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  • ढाई आखर प्रेम का । It's all about love

    आस्था    लग्न    प्रेम । इन तीनों अहसासों से एक ही मतलब निकलता है । प्यार-प्रेम । हिन्दी काब्यों में चर्चित है, "ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय "।

    दोस्तों ढाई आखर पढना वो अहसास करना ही है । अहसास करने वालों को ही अहसास की पूर्ति होती है । बच्चों को भी उनके परिजनों के तरफ से दिल लगाकर पढने की नसीहत हमेशा से दी जाती रही है ।और ये दिल लगाना, मन लगाना, लग्न से काम करना, आस्था विश्वास से आगे बढना, सब उसी के प्रारूप हैं ।

    दोस्तों यह ढाई आखर पढना मतलब आस्था पैदा करना ।मनुष्य को जिसमें आस्था हो जाता है उसमें वह पीछे नहीं रहता है ।क्योंकि उससे प्रेम हो जाता है और प्रेम हो गया तो फिर क्या कहना? 24 घंटे व्यस्तता के बाद भी पता नहीं कहाँ से और कैसे समय मिल जाता है और प्रेमी जरूर मिल जाते हैं ।

    और यही समय का मिल जाना ही तो आस्था है।जिसको हर वक्त एडजस्टमेंट करते रहना पड़ता है, फिर कभी न कभी समय मिल ही जाता है । तथा ऐसा प्यार ऐसी नेह या आस्था लगी रहे तो सफलता को मजबूर होकर आना पड़़ता है ।

    " वादा करो तुम रहोगे सनम, कभी हमसे कहीं  जुदा ना हो ।  सर-आँखों पर अपने रहमोकरम, इरादों के खुद का दीवाना हो ।। "

    इसी अहसास के साथ दिन गुजारने के लिए संदेश के साथ आप सपरिवार का दिन भी इस अहसास से गुजरे हम कामना करते हैं ।आपको हमारी सामुहिक हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं ।

     

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